आंटी का लाजवाब जिस्म

 दोस्तो, मेरा नाम नीलेश है और मैं आप सबको अपनी असली कहानी बताना चाहता हूँ। मैं पूना का रहने वाला हूँ और मैं जो आपको कहानी बताने जाने वाला हूँ.. वो एकदम सच्ची कहानी है। दरअसल यह मेरी जिन्दगी की पहली चुदाई का अनुभव है।

बात सन 2012 की है.. बारिश का मौसम था। ऐसी ही बारिश में मैं और मेरा दोस्त घूमने के लिए लोनावला गए थे।
उस दिन हमने बहुत ही सेक्सी लड़कियों और आंटियों को देखा, सभी लड़कियाँ वहाँ पर बारिश में एंजाय करने के लिए आई थीं, सब की सब बारिश में भीगी हुई मस्त माल और पटाखा लग रही थीं।

मेरा दोस्त तो शादीशुदा था और वो अपनी पत्नी से काफी खुश भी था, इस वजह से वो बारिश में भीगी कन्याओं को कामुक नजरों से नहीं देख रहा था.. वो बस एंजाय कर रहा था।

लेकिन मैं लड़कियों को देखे बिना एंजाय नहीं कर सकता था.. इसलिए दिन भर एक से बढ़ कर एक लौंडियों को मैंने जी भर के देखा और पूरी तरह से गर्म हो गया था।
लेकिन मैं इस गर्मी को शान्त करने के लिए कुछ कर नहीं सकता था।

घूमते-घूमते शाम के 5 बज चुके थे और मेरे दोस्त ने मुझे घर चलने को कहा।
हम दोनों लोनवाला से वापिस घर की ओर निकल पड़े।

मेरे अन्दर एक आग लग चुकी थी, मैं किसी भी हाल में किसी चूत को चोदना चाहता था, मैंने अपने दोस्त से अपने मन की बात बोली और वो हँस पड़ा।
बोला- ठीक है.. इतना जरूरी है.. तो आज तेरी इच्छा जरूर पूरी करवा दूँगा।

मुझे मालूम था कि वो शादी से पहले बहुत ही बड़ा चुदक्कड़ था।
वो मुझसे बोला- पहले पुणे चलते हैं।

हम वापस आते समय एक होटल में रुके और खाना खाया.. तभी मैंने देखा कि वो किसी को फोन कर रहा था। मुझे लगा कि वो अपने वाइफ को कॉल कर रहा होगा।
लेकिन नहीं.. वो किसी और से बात कर रहा था।

मैंने उससे पूछा- किसको कॉल किया था?
बोला- तू जल्दी से खाना खा और पुणे चल।

फिर हम रात के लगभग दस बजे पूना आए। जैसे ही गाड़ी पूना पहुँची.. तो गाड़ी वो चलाने लगा और कुछ टाइम के बाद उसने एक रोड पर गाड़ी रोकी और किसी को वापिस फोन किया और उसकी राह देखने लगा।

तभी एक एकदम हसीन आंटी ने कार का दरवाजा खोला और एकदम से गाड़ी में बैठ गईं।
मुझे तो कुछ समझ में ही नहीं आया कि क्या हो रहा है।

लेकिन वो आंटी थीं बड़ी सेक्सी.. एकदम गोरा रंग.. हाइट साढ़े पांच फुट की.. लम्बे बाल.. चूचे एकदम कड़क और गोल उठा हुआ पिछवाड़ा था।
सब मिला कर वो तूफान ही थी.. सच में ज़बरदस्त.. वो एक हसीन औरत थी।

मैं तो उसे देखते ही रह गया.. तभी मेरे दोस्त ने मुझे कहा- मेरी तरफ से ये तेरे लिए आज की रात का गिफ्ट है।

उसने मेरी जान-पहचान करवा दी।
उसका नाम शामली था.. वो कोई रंडी नहीं थी.. पर उसे नए-नए मर्दों की चाहत रहती थी.. वो पैसे भी नहीं लेती थी।

मेरे दोस्त को फिर मैंने उसके घर छोड़ा और फिर मैंने उसे मेरे साथ वाली सीट पर बिठाया और उसके साथ बातें करने लगा।
मैंने उसे किस किया.. वो क्या मस्त रिस्पोन्स दे रही थी.. जबरदस्त।

वो मेरे मुँह में से खुद को छुड़ा नहीं पा रही थी।
मैंने उससे कहा- लॉज में चलते हैं।
उसने ‘हाँ’ कह दी।

फिर हम दोनों लॉज में गए और एक कमरा पूरी रात के लिए ले लिया।

अब करीब 11 बज चुके थे। हम दोनों जैसे ही अन्दर पहुँचे.. तो उसने तुरंत ही मेरी ओर आना चालू कर दिया।
मुझे ऐसा लग रहा था कि मैं उसे नहीं.. वो मुझे चोदने आ रही है। उसमें मुझसे ज्यादा भूख थी।

उसने मुझे कसके पकड़ा और किस करना चालू किया, हमने बहुत देर तक चुम्बन किए। यह मेरे जीवन का सबसे पहला और इतनी देर का किस था।

तभी मैंने देखा कि मेरे लण्ड पर उसका हाथ था और वो उसे दबा रही थी।
मेरे हाथ में उसके दूध आ गए थे और चूमाचाटी चालू थी। कभी मैं उसकी पीठ पर हाथ घुमाता.. कभी पिछवाड़े पर..

तभी उसने मुझसे बोला- तुमने पहले कभी सेक्स किया है?
मैं बोला- नहीं..
तो वो बोली- आज मैं तुझे सब कुछ सिखा दूँगी।

मैंने उसे बिस्तर पर गिरा दिया और उसके ऊपर चढ़ गया।

वो बोली- अरे रूको तो.. पहले कपड़े तो निकालने दो।

मैं इतना गर्म हो गया था कि बस मैं उसे चोदना चाहता था। तभी वो मेरी शर्ट निकालने लगी और उसके बाद मेरी पैंट भी निकाल दी और मुझे पूरी तरह से नंगा कर दिया।

मेरा खड़े लौड़े को देख कर बोली- कितना बड़ा है रे तेरा.. एकदम मस्त।
वो लौड़े को हिलाने लगी और उसने खुद को भी जल्दी से नंगी कर लिया।

मैंने पहली बार किसी औरत को अपने सामने नंगी देखा था.. क्या माल थी वो.. ज़बरदस्त चीज थी।
मुझसे रहा नहीं गया और मैं उसके ऊपर चढ़ गया और उसके मम्मों को दबाने लगा और उसे किस करने लगा।

वो भी मेरे को कभी कान पर चुम्बन करती.. कभी छाती पर.. तो कभी गर्दन पर चूमती।
मैंने उससे कहा- मुझसे अब रहा नहीं जा रहा है।
उसने तुरंत ही कहा- क्या जल्दी है.. हमारे पास पूरी रात है।

लेकिन मैं नहीं माना.. मैंने उससे कहा- पहले तुम मुझे एक शॉट अभी लगाने दो.. फिर हम रात भर तो सेक्स करेंगे ही।
वो मेरी तड़प समझ गई और तुरंत ही उसने अपने पैर फ़ैला दिए..
हाय क्या नज़ारा था..
वो मैं कभी नहीं भूल सकता…
पहली बार खुली चूत सामने थी।

फिर मैंने अपना लण्ड उसकी चूत पर रखा और एक धक्का मारा.. लेकिन मेरा लण्ड फिसल गया।
फिर उसने मुस्कुरा कर अपने हाथ से मेरे लण्ड को पकड़ा और चूत के छेद पर सैट किया और बोली- पेल दे अन्दर..
मैंने ज़ोर से धक्का मारा.. तो लौड़ा थोड़ा अन्दर गया।

फिर मैंने एक और धक्का मारा.. तो पूरा अन्दर घुस गया था।
मैंने उसका तब चेहरा देखा.. उसने अपनी आँखें बंद की हुई थीं, उसके चेहरे पर एक अजीब सी खुशी थी।

अब मैंने ज़ोर-ज़ोर से चोदना चालू किया.. तो उसने खुद के पैर मेरे कंधों पर रख दिए और उसके मुँह में से मादक आवाज़ आने लगी थीं ‘आआहह.. आआहह.. मज़ा आ गया..’
सच में मजा आ रहा था उसे भी और मुझे भी मजा मिल रहा था।

कुछ मिनट की धकापेल के बाद हम दोनों हल्के हो गए और उसके बाद मैंने उसे रात भर मज़ा दिया और लिया।

वो मेरी चुदाई से बहुत खुश थी.. आज भी वो मुझसे कभी-कभी चुदती है.. लेकिन अभी मैं कोई नई आइटम देख रहा हूँ।
नई चूत मिलते ही उसके साथ की चुदाई को भी पेश करूँगा।

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